बैतूल /मुलताई - मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला सभी को याद होगा ही , इस मामले के बाद प्रदेश में और भी फर्जी भर्तियां हुई । समय का कालचक्र किस तरह घूमता है । सन 2008 में मुलताई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे टेक्नीशियन के पद पर तबादला होकर आया था हीरा सिंह ,
हीरा सिंह ने कुछ ही दिनों में फर्जी भर्तियों का कार्य शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसका कारोबार और उसका गिरोह भिंड मुरैना, ग्वालियर, विदिशा ,सीहोर में कार्य करने लगा ।
कई संस्थानों से फर्जी दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति दिलाने का कार्य करता था ।
23 अप्रैल को एसपी सिमाला प्रसाद ने इस घटना का खुलासा किया था । इस मास्टरमाइंड हीरा सिंह को वीआईपी रोड कोहेफिजा से गिरफ्तार कर लिया गया । इस पर 5000 का इनाम घोषित किया गया था
हीरा सिंह से पूछताछ के बाद जितनी भी फर्जी भर्तियां हुई है इसका पता चल सकेगा अगर इसकी जांच की जाए तो हजारों की संख्या में फर्जी कर्मचारी इसकी जद में आएंगे ।
जिनकी फर्जी नियुक्तियां हो चुकी है ।
ऐसे खुली पोल - बैतूल के अंबेडकर वार्ड निवासी शैलेंद्र वानखेड़े ने वार्ड बॉय की नौकरी के लिए आवेदन किया था । इस गिरोह से संपर्क के बाद जब उसे लैब टेक्नीशियन का नियुक्ति आदेश पत्र मिला । तो यह देखकर हैरान रह गया कि जिस जिस पद के लिए उसकी पात्रता ही नहीं है उसमें नियुक्ति क्यों और कैसे हो गई ? तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मामले का खुलासा होने पर अनिल पवैया भिंड ,संदीप सोनी मुलताई, तथा शैलेंद्र वानखेड़े मुलताई से पूछताछ की गई थी ।
5000 का ईनामी मास्टरमाइंड हीरा सिंह को एसआईटी की टीम
ने गिरफ्तार किया ।
जिसमें एसआईटी टीम के प्रमुख नितेश पटेल एसडीओपी बैतूल के निर्देशन में आरोपी को गिरफ्तार किया । अभी यह मामला विवेचना में लिया गया है ।
सूत्रों की माने तो ,अगर इस मामले की सही जांच की जा जाए तो बैतूल जिले में और भी कई फर्जी नियुक्तियों के मामले उजागर हो सकते हैं ?